पेड़ कटते समय क्यों सक्रिय नहीं रहते वन विभाग के मुखबिर

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Publish Date: | Wed, 20 Jan 2021 11:40 PM (IST)

मड़ियादो। जंगली जानवरों का शिकार हो या जंगलों की अवैध कटाई। हर मामले में वन विभाग की उस समय कोई सूचना नहीं मिलती, जब शिकार जंगल में शिकार कर लेते हैं और न ही उस समय उनका मुखबिर तंत्र सक्रिय रहता है, जब वनों की अवैध कटाई होती रहती है। ये बात जरुर है कि जब कीमती लकड़ी जंगल से कटकर कि सी के घर पहुंच जाती है और उसका फर्नीचर बनने लगता है, तब वन विभाग को उनके मुखबिर सूचना देते हैं और उपपर कार्‌रवाई करके वन विभाग वाहवाही लूटता है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें वन विभाग ने लाखों की लकड़ी जब्त की है, लेकि न उस समय उन्हें पता नहीं चलता, जब जंगल में वन माफिया खुलेआम कई घंटों तक पेड़ काटते रहते हैं।

बुधवार को जिले के गैसाबाद में वन विभाग ने बड़ी मात्रा में सागौन की लकड़ी जब्त की है। ये लकड़ी अवैध तरीके से एक घर में रखी गई थी और उससे फर्नीचर बनाया जा रहा था। गांव के कि सी व्यक्ति ने वन विभाग को सूचना दे दी और उसके बाद वन विभाग सर्च वारंट लेकर उस व्यक्ति के घर पहुंची और लकड़ी जब्त कर ली। जानकारी के अनुसार हटा वन परिक्षेत्र अमले को कि सी मुखबिर से सूचना मिली थी कि गैसाबाद निवासी शिब्बू विश्वकर्मा के घर पर अवैध रुप से सागौन की लकड़ी का स्टॉक कि या गया है और वहां पर फर्नीचर तैयार कि या जा रहा है। वन विभाग की टीम ने सर्च वारंट लिया और शिब्बू विश्वकर्मा के घर पहुंचे, जहां बड़ी मात्रा में अवैध रुप से लाई गई सागौन की लकड़ी मिली। वन टीम ने लकड़ी तो जब्त कर ली, लेकि न आरोपित फरार हो गया।

आखिर कहां सोए रहते हैं वन प्रहरी

जंगलों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक वन परिक्षेत्र में दर्जनों का स्टॉफ मौजूद है। वन प्रहरी का काम ही जंगल की रक्षा करना है, लेकि न जिले में कई बार अवैध वन कटाई की खबरें आती रहती हैं, लेकि न उन वन प्रहरियों को इसकी भनक तक नहीं होती। या ये कहा जा सकता है कि उनकी मिलीभगत से ये सब होता है। बाद में जब लकड़ी घर तक पहुंच जाती है और आस-पड़ौस के लोग अपनी निजी बुराई निकालने के लिए वन विभाग को सूचना देते हैं, तब जाकर कार्‌रवाई की जाती है। हटा वन परिक्षेत्र अधिकारी रुप कि शोर दीक्षित का कहना है कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली थी, इसके बाद उन्होंने सर्च वारंट लिया और आरोपित शिब्बू विश्वकर्मा के घर की तलाशी ली, जहां पर सागौन के पेड़ की सिल्लीं और लकड़ी से बना कु छ फर्नीचर मिला है। लकड़ी कहां से लाई गई थी और कि सके लिए फर्नीचर तैयार कि या जा रहा था, इसकी जानकारी ली जा रही है। आरोपित फरार हो गया है, जैसे ही उसे पकड़ा जाएगा, पूरे मामले का खुलासा होगा। उन्होंने बताया कि आरोपित के खिलाफ वन अपराध अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कि या गया है।

ऐसे कई मामले, जिनमें बाद में मिली सूचना

करीब ढाई माह पहले दमोह व पन्ना जिले की वार्डर पर बड़ी संख्या में खैर के पेड़ों की कटाई की गई थी। सैकड़ो की संख्या में काटे गए पेड़ों की वन विभाग को भनक तक नहीं लगी थी। बाद में जब उस खैर की लकड़ी का परिवहन कि या जा रहा था, तब कि सी को खबर मिल गई और उसके बाद वन विभाग तक खबर पहुंची। इसके बाद वन विभाग ने परिवहन की जा रही खैर की लकड़ी पकड़ने के लिए घेराबंदी की। जिसके बाद हटा व सगौनी वन परिक्षेत्र में आने वाले एक खेत में खैर की लकड़ी लावारिस हालत में पड़ी मिली थी, आरोपित एक भी नहीं मिला था। लावारिस मिली खैर की लकड़ी की कीमत करीब पांच लाख बताई गई थी।

Posted By: ZATV NEWS Network

 



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